वर्तमान में ऐसे कई लोग हैं जो एक उलझे हुए तरीके से आस्था रखते हैं। तुम लोगों की जिज्ञासा बहुत बड़ी है, अपने आशिषों को प्राप्त करने की तुम लोगों की इच्छा बहुत बड़ी है, और जीवन को आगे बढ़ाने की तुम लोगों की इच्छा बहुत छोटी है। आजकल, यीशु के विश्वासी उत्साह से भरे हुए हैं। यीशु उनका अपने स्वर्गीय घर में स्वागत करने जा रहा है—क्या वे विश्वास नहीं कर सकते? कुछ लोग अपने पूरे जीवन में विश्वासी बने रहते हैं, कुछ लोगों का विश्वास बीस से अधिक वर्षों के लिए बना रहता है, या चालीस या पचास वर्षों के लिए बना रहता है; वे बाइबल पढ़ते हुए कभी थकते नहीं हैं।
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मानव जाति के प्रबंधन का उद्देश्य
यदि लोग वास्तव में मानव जीवन के सही मार्ग को और साथ ही परमेश्वर के मानव जाति के प्रबंधन के उद्देश्य को पूरी तरह से समझ सकते हैं, तो वे अपने व्यक्तिगत भविष्य और भाग्य को अपने दिल में एक खजाने के रूप में थामे नहीं रहेंगे। वे अब और अपने माता-पिता की सेवा करना नहीं चाहेंगे, जो सूअरों और कुत्तों से भी बदतर हैं। क्या मनुष्य के भविष्य और भाग्य ठीक वर्तमान समय के पतरस के तथाकथित "माता-पिता" नहीं हैं? वे मनुष्य के अपने मांस और रक्त की तरह हैं।
परमेश्वर की इच्छा के प्रति सावधान रहना और पूर्णता को प्राप्त करना
जितना अधिक तू परमेश्वर की इच्छा के प्रति सचेत रहेगा, तेरा बोझ उतना अधिक हो जाएगा। तेरा बोझ जितना ज्यादा होगा, उतना तेरा अनुभव ज्यादा होगा। जब तू परमेश्वर की इच्छा के प्रति सचेत होता है, परमेश्वर इस बोझ को तुझे देगा, और तू परमेश्वर द्वारा उन बातों पर प्रबुद्ध किया जाएगा, जो उसने तुझे सौंपा है। परमेश्वर द्वारा यह बोझ तुझे दिए जाने के बाद, तुझे परमेश्वर के वचनों को खाते और पीते समय इस पहलु की सच्चाईयों पर ध्यान देना होगा। यदि तेरे ऊपर भाइयों और बहनों की जीवन दशा से जुड़ा बोझ है तो यह बोझ परमेश्वर ने तुझे सौंपा है, तब तेरी प्रतिदिन की प्रार्थना में भी यह बोझ हमेशा रहेगा। परमेश्वर जो करता ह वह तुझे सौंपा गया है, जिसे परमेश्वर करना चाहता है, उसे आगे ले जाने के लिए तू इच्छुक होगा, और यही अर्थ है परमेश्वर के बोझ को अपना बोझ समझना। इस बिंदु पर, तेरा परमेश्वर के वचन को खाना और पीना इन बातों के पहलुओं पर ध्यान केन्द्रित करेगा, और तू सोचेगा, मैं कैसे इन बातों को हल करूंगा? कैसे मैं भाइयों और बहनों को उनकी आत्मा में आनंद प्राप्त करने के लिए, स्वतंत्र होने दूंगा।
Hindi Christian Skit | ख़ुशफ़हमी | Do You Know the Criteria for Entering the Kingdom of Heaven?
Hindi Christian Skit | ख़ुशफ़हमी | Do You Know the Criteria for Entering the Kingdom of Heaven?
ली मिंगदाओ एक गृह-कलीसिया में प्रचारक है। वह बरसों से प्रभु में विश्वास रखता आ रहा है, और उसने हमेशा पौलुस की मिसाल का अनुसरण करते हुए प्रचार और कार्य किया है, कष्ट उठाए हैं और कीमत अदा की है। उसका मानना है, "अगर कोई मेहनत और कार्य करता है तो वह स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकता है, पुरस्कृत हो सकता है और मुकुट हासिल कर सकता है।" लेकिन अपने सहकर्मियों से मिलने पर, भाई झांग इस नज़रिये पर संदेह व्यक्त करता है। ली मिंगदाओ आश्वस्त नहीं होता और घर लौट आता है, और बाइबल को अच्छी तरह देख लेने के बाद, वह भाई झांग से गर्मागर्म बहस करता है... क्या प्रभु के लिये मेहनत और कार्य करना परमेश्वर की इच्छा को पूरा करना है? क्या इस मार्ग को अपनाने पर अंतत: कोई उन्नत होकर स्वर्ग के राज्य में प्रवेश कर सकता है? ये सब जानने के लिये नाट्य-प्रस्तुति 'ख़ुशफ़हमी' देखें।
और पढ़ें: स्वर्गारोहण के बारे में जो हमारा धारणा हैं, क्या यह प्रभु येशु के वचन के अनुरूप हैं?
Hindi Gospel Movie | मैं एक नेक इंसान हूँ! | How to Be Good People in the Eyes of God
Hindi Gospel Movie | मैं एक नेक इंसान हूँ! | How to Be Good People in the Eyes of God
ईसाई धर्म में आस्था रखने वाली यांग हुईशिन को बचपन से ही एक अच्छा इंसान बनना पसंद था। उसे किसी को नाराज़ करना अच्छा नहीं लगता। वह मानती है कि वह एक अच्छी इंसान है, क्योंकि वह दयालु है और सबके साथ सहमति बनाकर चलती है। लेकिन अंत के दिनों के परमेश्वर के सुसमाचार को स्वीकारने और परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना से गुज़रने के बाद ही, उसमें एक जागृति आती है। उसे अहसास होता है कि वह सचमुच एक अच्छी इंसान नहीं है। बल्कि वह शैतानी फलसफों के अनुसार जीती है, और बेहद ख़ुदगर्ज़, धूर्त "शरीफ इंसान" है। वह दिल में सत्य की खोज करने और ऐसी अच्छी इंसान बनने का संकल्प लेती है जो ईमानदार और सच्चा हो... यांग हुईशिन को ऐसे क्या अनुभव हुए जिनके कारण उसके अंदर ऐसा रूपांतरण हुआ?
वीडियो देखें: परमेश्वर का वचन यहाँ है - जीवन और आध्यात्मिक आपूर्ति
केवल परमेश्वर को प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है
आज, जब तुम लोग परमेश्वर को जानने और प्रेम करने की कोशिश करते हो, तो एक ओर तुम लोगों को अवश्य कठिनाई और शुद्धिकरण को झेलना चाहिए और दूसरी ओर, तुम लोगों को एक क़ीमत अवश्य चुकानी चाहिए। परमेश्वर को प्रेम करने के सबक से ज्यादा गहरा कोई सबक नहीं है, और ऐसा कहा जा सकता है कि जीवन भर के विश्वास से लोग जिस सबक को सीखते हैं वह है कि परमेश्वर को किस प्रकार से प्रेम करें। कहने का अर्थ है यदि तुम परमेश्वर पर विश्वास करते हो तो तुम्हें उससे प्रेम अवश्य करना चाहिए।
परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और परमेश्वर के चरण-चिन्हों का अनुसरण करो
अब, तुम लोगों को परमेश्वर की प्रजा बनने की कोशिश करनी है, और तुम सब पूरी प्रविष्टि को सही राह पर शुरू करोगे। परमेश्वर के लोग होने का अर्थ है राज्य के युग में प्रवेश करना। आज, तुम सब आधिकारिक तौर पर राज्य के प्रशिक्षण में प्रवेश करना शुरू कर रहे हो, और तुम लोगों के भावी जीवन अब पहले की तरह सुस्त और लापरवाह नहीं रहेंगे; ऐसे जीवन परमेश्वर द्वारा अपेक्षित मानकों को प्राप्त करने में असमर्थ होते हैं। अगर तुम्हें कोई अत्यावश्यकता महसूस नहीं होती है, तो यह दिखाता है कि तुम खुद को सुधारने की कोई इच्छा नहीं रखते हो, कि तुम्हारा अनुसरण उलझा हुआ और भ्रमित है, और तुम परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने में असमर्थ हो।
परमेश्वर की इच्छा-एक ईमानदार व्यक्ति होना आसान नहीं है
परमेश्वर की इच्छा-एक ईमानदार व्यक्ति होना आसान नहीं है
ज़िक्सिन, हुबेई प्रांत
सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के समय के कार्य को स्वीकार करने के बाद, परमेश्वर के वचनों को पढ़ने और उपदेशों को सुनने के माध्यम से, मुझे अपने विश्वास में एक ईमानदार व्यक्ति होने का महत्व समझ में आया, और मैं जान पाई कि केवल एक ईमानदार व्यक्ति बनकर ही कोई परमेश्वर का उद्धार पा सकता है। इसलिए मैंने वास्तविक जीवन में एक ईमानदार व्यक्ति बनने का अभ्यास करना शुरू किया।
परमेश्वर की इच्छा-परमेश्वर की सेवा करते समय नई चालाकियाँ मत ढूँढो
परमेश्वर की सेवा करते समय नई चालाकियाँ मत ढूँढो
हेयी झुआंघे सिटी, लिआओनिंग प्रांत
मुझे अभी-अभी कलीसिया के अगुआ का उत्तरदायित्व लेने के लिए पदोन्नत किया गया था। लेकिन कुछ अवधि तक की कठिन मेहनत के बाद, न केवल कलीसिया का इंजील का कार्य फीका पड़ गया था, बल्कि इंजील दल में मौजूद मेरे सभी भाई-बहन भी नकारात्मकता और कमज़ोरी में जी रहे थे। इस परिस्थिति का सामना करके, मैं अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं रख सकी।
6. बाइबल के साथ वास्तव में कैसे पेश आना चाहिए और उसका उपयोग किस तरह से करना चाहिए कि वह परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हो? बाइबल का मूलभूत मूल्य क्या है?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
आज, मैं इस रीति से बाइबल की चीरफाड़ कर रहा हूँ और इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं इस से नफरत करता हूँ, या सन्दर्भ के लिए इसके मूल्य को नकारता हूँ। अंधकार में रखे जाने से तुम्हें रोकने के लिए मैं तुम्हारे लिए बाइबल के अंतर्निहित मूल्यों और इसकी उत्पत्ति की व्याख्या कर रहा हूँ। क्योंकि बाइबल के बारे में लोगों के अनेक दृष्टिकोण हैं, और उनमें से अधिकांश ग़लत हैं; इस तरह से बाइबल पढ़ना न केवल उन्हें उन चीज़ों को प्राप्त करने से रोकता है जो उन्हें प्राप्त करनी चाहिए, बल्कि, अधिक महत्वपूर्ण यह है, कि यह उस कार्य में भी बाधा डालता है जिसे करने का मैं इरादा करता हूँ।
5. परमेश्वर में सच्चा विश्वास वास्तव में क्या है? किसी को परमेश्वर में कैसे विश्वास करना चाहिए कि वह परमेश्वर से प्रशंसा प्राप्त कर सके?
परमेश्वर में सच्चा विश्वास वास्तव में क्या है? किसी को परमेश्वर में कैसे विश्वास करना चाहिए कि वह परमेश्वर से प्रशंसा प्राप्त कर सके?
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
यद्यपि बहुत से लोग परमेश्वर पर विश्वास करते हैं, किंतु बहुत कम लोग समझते हैं कि परमेश्वर पर विश्वास करने का अर्थ क्या है, और परमेश्वर के मन के अनुरूप बनने के लिये उन्हें क्या करना चाहिए। ऐसा इसलिए है क्योंकि यद्यपि लोग "परमेश्वर" शब्द और "परमेश्वर का कार्य" जैसे वाक्यांश से परिचित हैं, किंतु वे परमेश्वर को नहीं जानते हैं, और उससे भी कम वे उसके कार्य को जानते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि तब वे सभी जो परमेश्वर को नहीं जानते हैं, वे दुविधायुक्त विश्वास रखते हैं। लोग परमेश्वर पर विश्वास करने को गंभीरता से नहीं लेते हैं, क्योंकि परमेश्वर पर विश्वास करना उनके लिये अत्यधिक अनजाना और अजीब है।
न्याय क्या है-सेवा में समन्वय का महत्व
न्याय क्या है-सेवा में समन्वय का महत्व
मेई जी जिनान शहर, शैंडॉन्ग प्रांत
कलीसिया के प्रशासन को उसके मूल रूप में बदलने के बाद, परमेश्वर के घर में अगुआ के हर स्तर के लिए साझेदारी स्थापित की गई थी। उस समय, मैं सोचती थी कि यह अच्छी व्यवस्था है। मेरी क्षमता कम थी और मेरे पास काफी काम था; मुझे वाकई एक साझेदार की ज]रूरत थी जो मेरे क्षेत्र में सभी तरह के कार्य पूरा करने में मेरी मदद करे।
ईमानदार व्यक्ति-झूठ के पीछे क्या है
झूठ के पीछे क्या है
ज़ियाओजिंग हेज़ शहर, शानडोंग प्रांत
हर बार जब मैंने परमेश्वर के वचनों को हमें ईमानदार बनने और सही ढंग से बोलने के लिए कहते हुए देखा, मैंने सोचा, "मुझे सही ढंग से बोलने में कोई समस्या नहीं है। क्या यह सिर्फ सच को सच बोलना तथा चीजों को वैसे ही बताना नहीं है, जैसे कि वे हैं? क्या यह उतना आसान नहीं है? इस संसार में मुझे जिस बात ने सबसे ज्यादा चिढ़ाया है, वह है लोगों का सुशोभित तरीके से बोलना।" इस वजह से, मैंने अत्यधिक विश्वास को महसूस किया, यह सोचकर कि इस सम्बन्ध में मुझे कोई समस्या नहीं है। लेकिन केवल परमेश्वर के प्रकाशन के माध्यम से मुझे पता चला कि, सत्य में प्रवेश किये बिना या किसी के स्वभाव को बदले बिना, कोई भी किसी भी तरह से सही तरीके से नहीं बोल सकता।
परमेश्वर की इच्छा-सही मायने में एक अच्छे व्यक्ति का मानदंड
सही मायने में एक अच्छे व्यक्ति का मानदंड
मोरान लीन्यी शहर, शानडोंग प्रांत
जब से मैं एक बच्ची थी, मैंने हमेशा, दूसरे लोग मुझे कैसे देखते हैं और उनका मेरे लिए मूल्यांकन क्या है, इस बात को बहुत महत्व दिया। ताकि मैंने जो कुछ भी किया उसके लिए दूसरों से प्रशंसा प्राप्त कर सकूँ, जब भी कोई बात उठी, मैंने तब भी किसी से कोई तर्क नहीं किया, ताकि मेरी अच्छी छवि जो लोगों में मेरे लिए थी वह बनी रहे। अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करने के बाद, मैंने इसी तरीके से काम किया, जैसी अच्छी छवि मेरे भाइयों और बहनों में मेरे लिए थी उसे जिस तरह भी संभव हो कायम रखा।इससे पहले, जब मैं कार्य-प्रभारी थी, मेरा नेता अक्सर कहता था कि मेरा प्रदर्शन एक "हाँ-कहने वाला व्यक्ति," की तरह था और ऐसा प्रदर्शन नहीं था जो सच्चाई को अभ्यास में लाता है। मैंने कभी इसे दिल पर नहीं लिया, बल्कि इसके विपरीत अगर अन्य लोगों ने मुझे एक अच्छे व्यक्ति के रूप में माना, तब मुझे संतुष्टि हुई।
परमेश्वर को जानना-परमेश्वर पर विश्वास केवल शान्ति और आशीषों को खोजने के लिए ही नहीं होना चाहिए।
परमेश्वर पर विश्वास केवल शान्ति और आशीषों को खोजने के लिए ही नहीं होना चाहिए।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
आज, आपको सही रास्ते पर नियत अवश्य होना चाहिए क्योंकि तुम व्यावहारिक परमेश्वर में विश्वास करते हो। परमेश्वर में विश्वास करके, तुम्हें सिर्फ़ आशीषों को ही नहीं खोजना चाहिए, बल्कि परमेश्वर को प्रेम करने और परमेश्वर को जानने की कोशिश करनी चाहिए। इस प्रबुद्धता और तुम्हारी स्वयं की खोज के माध्यम से, तुम उसके वचन को खा और पी सकते हो, परमेश्वर के बारे में एक सच्ची समझ को विकसित कर सकते हो, और परमेश्वर के लिए एक सच्चा प्रेम रख सकते हो जो तुम्हारे हृदय से आता है।
4. जो भी परमेश्वर में विश्वास करता है, उन्हें झूठे चरवाहों और मसीह-शत्रुओं को पहचानने में सक्षम होना चाहिए ताकि वह धर्म को त्याग कर परमेश्वर की ओर लौट सके।
जो भी परमेश्वर में विश्वास करता है, उन्हें झूठे चरवाहों और मसीह-शत्रुओं को पहचानने में सक्षम होना चाहिए ताकि वह धर्म को त्याग कर परमेश्वर की ओर लौट सके।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"परमेश्वर यहोवा यों कहता है: हाय इस्राएल के चरवाहों पर जो अपने अपने पेट भरते हैं! क्या चरवाहों को भेड़-बकरियों का पेट न भरना चाहिए? तुम लोग चर्बी खाते, ऊन पहिनते और मोटे मोटे पशुओं को काटते हो; परन्तु भेड़-बकरियों को तुम नहीं चराते। तुम ने बीमारों को बलवान न किया, न रोगियों को चंगा किया, न घायलों के घावों को बाँधा, न निकाली हुई को लौटा लाए, न खोई हुई को खोजा, परन्तु तुम ने बल और जबरदस्ती से अधिकार चलाया है" (यहेजकेल 34:2-4)।
"झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेस में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु अन्तर में वे फाड़नेवाले भेड़िए हैं" (मत्ती 7:15)।
"वे अंधे मार्गदर्शक हैं और अंधा यदि अंधे को मार्ग दिखाए, तो दोनों ही गड़हे में गिर पड़ेंगे" (मत्ती 15:14)।
लोग अक्सर कहते हैं, "सदाचार को मिले पुरस्कार, बुराई को प्रतिकार", तो परमेश्वर सभी बुरे लोगों को ख़त्म क्यों नहीं कर देते?
लोग अक्सर कहते हैं, "सदाचार को मिले पुरस्कार, बुराई को प्रतिकार", तो परमेश्वर सभी बुरे लोगों को ख़त्म क्यों नहीं कर देते?
परमेश्वर के वचन से जवाब:
आज, उनके कार्यों की परवाह किए बगैर, और इस शर्त के साथ कि वे परमेश्वर के प्रबंधन को बाधित न करें और उनका परमेश्वर के नए कार्य के साथ कोई लेना देना न हो, ऐसे लोगों को अनुकूल दण्ड के अधीन नहीं किया जाएगा, क्योंकि क्रोध का दिन अभी तक नहीं आया है। लोग विश्वास करते हैं कि ऐसा बहुत कुछ है जिससे परमेश्वर को पहले ही निपट लेना चाहिए था, और वे सोचते हैं कि उन कुकर्मियों को जितनी जल्दी संभव हो उतनी जल्दी दण्ड के अधीन किया जाना चाहिए।
51. मैंने परमेश्वर के उद्धार का अनुभव किया
मैंने परमेश्वर के उद्धार का अनुभव किया
चेंग हाओ, योंगझाऊ शहर, हुनान प्रांत
परमेश्वर की कृपा से, हमारे कर्तव्यों को पूरा करने के लिए, मेरी पत्नी और मुझे सुसमाचार के दल के द्वितीय-क्रम में पदोन्नत किया गया था। कुछ समय पहले, मेरी पत्नी को एक दल का निदेशक पदोन्नत किया गया था, जबकि, अपने घमंडी और अनियंत्रित व्यवहार के कारण मैंने पवित्र आत्मा के कार्य को गँवा दिया और मुझे अपने कृत्यों पर चिंतन करने के लिए घर भेज दिया गया था।
परमेश्वर का अनुसरण करने और लोगों का अनुसरण करने में अंतर
परमेश्वर का अनुसरण करने और लोगों का अनुसरण करने में अंतर
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर का अनुसरण करने में प्रमुख महत्व इस बात का है कि हर चीज परमेश्वर के वास्तविक वचनों के अनुसार होनी चाहिए: चाहे तुम जीवन में प्रवेश कर रहे हो या परमेश्वर की इच्छा की पूर्ति, सब कुछ परमेश्वर के वास्तविक वचनों के आस-पास ही केंद्रित होना चाहिए। यदि तुम्हारा समागम और अनुसरण परमेश्वर के वास्तविक शब्दों के आसपास केंद्रित नहीं होते हैं, तो तुम परमेश्वर के शब्दों के लिए एक अजनबी हो, और पवित्र आत्मा के कार्य से पूरी तरह से वंचित हो।
66. एक सच्ची भागीदारी
एक सच्ची भागीदारी
फैंग ली एन्यांग शहर, हेनान प्रान्त
हाल ही में मैंने सोचा था कि मैंने एक सामंजस्यपूर्ण भागीदारी में प्रवेश किया है। मैं और मेरा सहभागी किसी भी चीज़ पर चर्चा कर सकते थे, कभी-कभी मैंने उससे यहाँ तक कि मेरी कमियों की ओर इशारा करने के लिए भी कहा, और हमने कभी भी लड़ाई नहीं की, इसलिए मैंने सोचा कि हमने एक सामंजस्यपूर्ण भागीदारी को प्राप्त कर किया है। किन्तु जब तथ्य प्रकट हुए, तो एक सच्ची सामंजस्यपूर्ण भागीदारी ऐसी कुछ नहीं थी जिसकी मैंने कल्पना की थी।
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