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परमेश्वर की इच्छा-एक ईमानदार व्यक्ति होना आसान नहीं है

परमेश्वर की इच्छा-एक ईमानदार व्यक्ति होना आसान नहीं है

ज़िक्सिन, हुबेई प्रांत
सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के समय के कार्य को स्वीकार करने के बाद, परमेश्वर के वचनों को पढ़ने और उपदेशों को सुनने के माध्यम से, मुझे अपने विश्वास में एक ईमानदार व्यक्ति होने का महत्व समझ में आया, और मैं जान पाई कि केवल एक ईमानदार व्यक्ति बनकर ही कोई परमेश्वर का उद्धार पा सकता है। इसलिए मैंने वास्तविक जीवन में एक ईमानदार व्यक्ति बनने का अभ्यास करना शुरू किया।

परमेश्वर का कार्य-अपनी असलियत की सही पहचान

अपनी असलियत की सही पहचान

शाओशाओ शूझाऊ शहर, ज़िआंग्सु प्रांत
चर्च के काम-काज की आवश्यकताओं के कारण, मुझे अपने कर्तव्य के निर्वाह के लिए एक दूसरे स्थान पर भेजा गया था। उस समय, उक्त स्थान पर सुसमाचार का कार्य संतोषजनक स्थिति मेँ नहीं था और भाइयों और बहनों की स्थिति समान्यतया अच्छी नहीं थी। लेकिन चूंकि मुझे पवित्र आत्मा का सानिध्य प्राप्त था, प्रतिकूल अवस्था के बावजूद भी मैंने सभी सौंपे हुए कार्य को पूर्ण आत्मविश्वास के साथ हाथ मेँ लिया। सुपुर्द कार्य को स्वीकार करने के बाद, मैंने पूर्ण दायित्व बोध, सम्पूर्ण प्रबुद्धता का अनुभव किया और यह भी सोचा कि मुझमें पर्याप्त इच्छा शक्ति है।

न्याय क्या है-ओहदा खोने के बाद ...

ओहदा खोने के बाद ...

हुईमीन जियाओजूओ शहर, हेनान प्रदेश
हर बार जब मैं किसी को बदले जाने और इस कारण उनके दुखी, कमजोर या रुष्ट होने और उनके अनुसरण न करने की घटना को देखती थी या इस बारे मेँ सुनती थी तो ऐसे लोगों के प्रति मेरे मन मेँ निरादर का भाव आ जाता था। मैं सोचती थी कि यह सब इससे अधिक कुछ नहीं है कि कलीसिया के अंतर्गत अलग-अलग लोगों के अलग-अलग कार्य कलाप हैं, यहाँ उच्च और निम्न मेँ कोई भेद नहीं है और हम सब परमेश्वर की संतति हैं तथा ऐसा कुछ भी नहीं है जिसको हम तुच्छ समझें।

न्याय क्या है- इस प्रकार की सेवा सच में तिरस्करणीय है

इस प्रकार की सेवा सच में तिरस्करणीय है

डिंग निंग हेज़े सिटी, शैन्डॉन्ग प्रांत
पिछले कुछ दिनों में, कलीसिया ने मेरे कार्य में एक परिवर्तन की व्यवस्था की है। जब मुझे यह नया कार्यभार मिला, तो मैंने सोचा, "मुझे अपने भाई—बहनों के साथ एक सभा बुलाने, मामलों के बारे में साफ तौर पर उनसे बात करने, और उन पर अच्छा प्रभाव छोड़ने के लिए इस अंतिम अवसर को लेने की जरूरत है।" इसलिए, मैंने कई उपयाजकों से मुलाकात की, और हमारी मुलाकात की समाप्ति पर, मैंने कहा, "मुझसे यहाँ से चले जाने और एक अन्य कार्य पर जाने के लिए कहा गया है। मैं उम्मीद करती हूँ कि आप लोग उस अगुआ को स्वीकार करेंगे जो मेरी जगह आएगी और एक दिल और एक मन से उसके साथ मिलकर कार्य करेंगे।"

न्याय क्या है-पतन से पहले की एक घमंडी आत्मा

पतन से पहले की एक घमंडी आत्मा

बाईशे शेन्यांग सिटी
किसी कार्य की आवश्यकता की वजह से, मेरा स्थानांतरण एक अन्य कार्यक्षेत्र में कर दिया गया था। उस समय, मैं परमेश्वर की बहुत आभारी थी। मुझे महसूस होता था कि मुझमें बहुत कमी है, फिर भी परमेश्वर के दिव्य प्रोत्साहन के माध्यम से, मुझे इस तरह के अद्भुत कार्य क्षेत्र में अपने कर्तव्यों को पूरा करने का मौका दिया गया था। मैंने अपने हृदय में परमेश्वर के प्रति एक प्रतिज्ञा की: मैं परमेश्वर को बदला चुकाने के लिए अपनी पूरी कोशिश करूँगी।

न्याय क्या है-यह जानना कि मैं फरीसियों के मार्ग पर चलती आई हूँ

यह जानना कि मैं फरीसियों के मार्ग पर चलती आई हूँ

वुज़िन ताइयुआन सिटी, शांग्ज़ी प्रांत
कोई चीज़ जिसके बारे में हमने पिछले संवादों में हमेशा चर्चा की है, वह है पतरस और पौलुस द्वारा चले गए मार्ग। यह कहा जाता है कि पतरस ने स्वयं को और परमेश्वर को जानने पर ध्यान दिया था, और ऐसा व्यक्ति था जो परमेश्वर द्वारा अनुमोदित था, जबकि पौलुस ने केवल अपने कार्य, प्रतिष्ठा और हैसियत पर ध्यान दिया था, और ऐसा व्यक्ति था जो परमेश्वर द्वारा तिरस्कृत था।

परमेश्वर के नक़्शे-कदम-मैं परमेश्वर को जानने का मार्ग देखता हूँ

मैं परमेश्वर को जानने का मार्ग देखता हूँ

शिआओकाओ चांग्ज़ी सिटी, शांक्ज़ी प्रदेश
एक दिन, मैंने एक निबंध में परमेश्वर के वचन का निम्न अवतरण पढ़ा "पतरस ने यीशु को कैसे जाना": "यीशु का अनुसरण करने के दौरान, पतरस ने उसके जीवन के बारे में हर चीज़ का अवलोकन किया और उसे हृदय से लगाया: उसके कार्यों को, वचनों को, गतिविधियों को, और अभिव्यक्तियों को। …

परमेश्वर की इच्छा-परमेश्वर की सेवा करते समय नई चालाकियाँ मत ढूँढो

परमेश्वर की सेवा करते समय नई चालाकियाँ मत ढूँढो

हेयी झुआंघे सिटी, लिआओनिंग प्रांत
मुझे अभी-अभी कलीसिया के अगुआ का उत्तरदायित्व लेने के लिए पदोन्नत किया गया था। लेकिन कुछ अवधि तक की कठिन मेहनत के बाद, न केवल कलीसिया का इंजील का कार्य फीका पड़ गया था, बल्कि इंजील दल में मौजूद मेरे सभी भाई-बहन भी नकारात्मकता और कमज़ोरी में जी रहे थे। इस परिस्थिति का सामना करके, मैं अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं रख सकी।

पवित्र आत्मा का कार्य-व्यक्तिगत प्रतिशोध का स

11. व्यक्तिगत प्रतिशोध का स

झोउलीजिंटाईशहर, शान्डोंगप्रांत
कुछ समय पहले हमे अपने क्षेत्र में ज़िलों का चयन करना पड़ता था, और अगुआओं को चुनने के लिए हमारे सिद्धांतों के आधार पर एक भाई होता था जो तुलनात्मक तौर पर एक उपयुक्त उम्मीदवारहोता था। मैंने उसे ज़िले का अगुआ बनाने की तैयारी कर ली। एक दिन मैं जब इस भाई के साथ बातचीत कर रही थी;उसने उल्लेख किया कि वह ऐसा महसूस करता था कि मै अपने काम में अत्यधिक व्यस्त हो गयी थी, बहुत अधिक, और मेरे साथ बैठने में कुछ आनंद नहीं आ रहा था... जब मैंने यह सुना, मुझे लगा कि मैं बहुत घटिया हूँ। मुझे बहुत बुरा लगा; मैंने तुरंत ही इस भाई के लिए एक धारणा विकसित कर ली, और उसके बाद मैंने उसे ज़िला के अगुआ के रूप में आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं बनाई।

परमेश्वर को जानना-कठिनाइयों के बीच परमेश्वर की इच्छा को समझना

कठिनाइयों के बीच परमेश्वर की इच्छा को समझना

ज़ियाओ रुई पैंज़िहुआ सिटी, सिचुआन प्रांत
जब मैं सुसमाचार का प्रचार कर रहा था, तो मेरा सामना विधर्मी अगुआओं से हुआ जो प्रतिरोध और गड़बड़ी करने के लिए झूठी गवाही देते थे, और पुलिस बुला लेते थे। इस वजह से जिन लोगों को मैं उपदेश दे रहा था वे हमारे संपर्क में आने की हिम्मत नहीं कर रहे थे, और जिन्होंने अभी-अभी सुसमाचार को स्वीकार किया था, वे परमेश्वर के कार्य में विश्वास करने में असमर्थ हो रहे थे।

परमेश्वर का कार्य-बेड़ियों को तोड़ना

16. बेड़ियों को तोड़ना

झेंग्ज़ी झेंगझोउ शहर, हेनान प्रांत
दस साल पहले, अपनी अहंकारी प्रकृति के कारण, मैं कभी भी कलीसिया की व्यवस्थाओं का पूरी तरह से पालन करने में सक्षम नहीं थी। अगर मुझे उपयुक्त लगा तो मैं उसका पालन करती थी, लेकिन अगर मुझे नहीं लगा तो मैं चुना करती थी कि उसका पालन करना है या नहीं। इसके परिणामस्वरूप अपने कर्तव्य को पूरा करने के दौरान कार्य की व्यवस्थाओं का गंभीरता से उल्लंघन होता था। मैं अपने खुद के काम करती थी और परमेश्वर के स्वभाव का अपमान करती थी, और बाद में मुझे घर भेज दिया गया था।

परमेश्वर का स्वभाव-अहंकार का कड़वा फल

परमेश्वर का स्वभाव-अहंकार का कड़वा फल

हू किंग सुज़ोउ शहह, अन्हुई प्रांत
जब मैंने परमेश्वर के वचनों को यह कहते हुए देखा: "आपमें से वे लोग जो मार्गदर्शक के रूप में सेवा करते हैं, वे हमेशा अधिक चतुरता प्राप्त करना चाहते हैं, बाकी सब से श्रेष्ठ बनना चाहते हैं, नई तरकीबें पाना चाहते हैं ताकि परमेश्वर देख सकें कि आप लोग वास्तव में कितने महान मार्गदर्शक हैं। … आप लोग हमेशा दिखावा करना चाहते हैं; क्या यह निश्चित रूप से एक अहंकारी प्रकृति का प्रकटन नहीं है?"

परमेश्वर का कार्य-जीवन और मृत्यु की एक जंग

परमेश्वर का कार्य-जीवन और मृत्यु की एक जंग

चैंग मोयांग ज़ेंगज़ो सिटी, हेनान प्रदेश
"जब तू अपने देह के विरूद्ध विद्रोह करता है, तो तेरे भीतर निश्चय ही एक युद्ध होगा। शैतान कोशिश करेगा और तुझे इसका अनुसरण करने के लिए बाध्य करेगा, तुझसे देह की धारणाओं का अनुसरण करवाने के लिए कोशिश करेगा और देह के हितों को बनाए रखेगा—परन्तु परमेश्वर के वचन तुझे प्रबुद्ध करेंगे और तेरे भीतर रोशनी प्रदान करेंगे, और इस समय यह तुझ पर निर्भर करता है कि तू परमेश्वर का अनुसरण करे या फिर शैतान का अनुसरण करे।

परमेश्वर को जानना-परमेश्वर के वचनों ने मुझे जगा दिया है

परमेश्वर को जानना-परमेश्वर के वचनों ने मुझे जगा दिया है

मियाओ ज़ियाओ ज़िनान शहर, शैंडॉन्ग प्रांत
अतीत में, मैं हमेशा सोचा करती थी जब परमेश्वर ने कहा था कि "एक कठपुतली और ग़द्दार हो जो महान श्वेत सिंहासन से दूर भाग रहा है" तो वह उन लोगों का उल्लेख कर रहा था जो कार्य के इस चरण को स्वीकार करते हें लेकिन अंत में पीछे हट जाते हैं क्योंकि वे उसकी ताड़ना और न्याय सहने के अनिच्छुक होते हैं। इसलिए, जब भी मैं भाइयों और बहनों को किसी भी कारण से इस मार्ग से पीछे हटते हुए देखती थी, तो मेरा दिल उनके प्रति तिरस्कार से भर जाया करता था: बड़े सफेद सिंहासन से एक और कठपुतली और कपटी भाग गया जो परमेश्वर का दंड प्राप्त करेगा। इसी के साथ, मुझे यह लगता था कि मैं परमेश्वर के न्याय को स्वीकार में उचित रूप से व्यवहार कर रही हूँ और परमेश्वर का उद्धार पाने से बहुत दूर नहीं हूँ।

परमेश्वर का कार्य-बचाय जाने के बारे में समझ

बचाय जाने के बारे में समझ

लिंग क्वींग ग्विंग्ज़्हौ नगर, षंडोंग प्रांत
इन अनेक वर्षों में परमेश्वर का अनुसरण करते हुए, मैंने अपने परिवार और देह के आनंदों को त्याग दिया है, और मैं पूरा दिन कलीसिया में अपना कार्य करने में व्यस्त रही हूँ। इसलिए मैं मानती हूँ: जब तक मैं कलीसिया में मुझे सौंपे गए काम को छोड़ती नहीं हूँ, परमेश्वर को धोखा नहीं देती हूँ, कलीसिया को छोड़ती नहीं हूँ, और अंत तक परमेश्वर का अनुसरण करती हूँ, परमेश्वर मुझे क्षमा करेगा और मैं परमेश्वर द्वारा बचाई जाती रहूंगी। मैं यह भी मानती थी कि मैं परमेश्वर द्वारा मुक्ति के मार्ग पर चल रही हूँ, और मुझे बस इतना करना है कि मुझे अंत तक उसका अनुसरण करना है।

न्याय क्या है-सेवा में समन्वय का महत्व

न्याय क्या है-सेवा में समन्वय का महत्व

मेई जी जिनान शहर, शैंडॉन्ग प्रांत
कलीसिया के प्रशासन को उसके मूल रूप में बदलने के बाद, परमेश्वर के घर में अगुआ के हर स्तर के लिए साझेदारी स्थापित की गई थी। उस समय, मैं सोचती थी कि यह अच्छी व्यवस्था है। मेरी क्षमता कम थी और मेरे पास काफी काम था; मुझे वाकई एक साझेदार की ज]रूरत थी जो मेरे क्षेत्र में सभी तरह के कार्य पूरा करने में मेरी मदद करे।

परमेश्वर का कार्य-पवित्रा आत्मा सैद्धांतिक तरीके में काम करता है

पवित्रा आत्मा सैद्धांतिक तरीके में काम करता है

किन शुटिंग लिनयी शहर, शैंडॉन्ग प्रांत
कुछ समय से, यद्यपि मैंने परमेश्वर के वचनों को खाना और पीना बंद नहीं किया था, मैं कभी भी प्रकाश को महसूस नहीं करती थी। मैं ने इसके लिए परमेश्वर से प्रार्थना की थी लेकिन, उसके बाद भी, मुझे प्रबुद्ध नहीं किया गया था। इसलिए मैं सोचती थी कि, "मुझे जो खाना और पीना चाहिए था मैंने उसे खाया और पिया है और परमेश्वर मुझे प्रबुद्ध नहीं कर रहा है। ऐसा कुछ नहीं हैं जो मैं कर सकती हूँ, और मेरे पास परमेश्वर के वचन हासिल करने की योग्यता नहीं है। परमेश्वर द्वारा हर मनुष्य को प्रबुद्ध करने का समय एक होता है, इसलिए इसके लिए शीघ्रता करने की कोशिश करने का कोई उपयोग नहीं है।"

ईमानदार व्यक्ति-झूठ के पीछे क्या है

झूठ के पीछे क्या है

ज़ियाओजिंग हेज़ शहर, शानडोंग प्रांत
हर बार जब मैंने परमेश्वर के वचनों को हमें ईमानदार बनने और सही ढंग से बोलने के लिए कहते हुए देखा, मैंने सोचा, "मुझे सही ढंग से बोलने में कोई समस्या नहीं है। क्या यह सिर्फ सच को सच बोलना तथा चीजों को वैसे ही बताना नहीं है, जैसे कि वे हैं? क्या यह उतना आसान नहीं है? इस संसार में मुझे जिस बात ने सबसे ज्यादा चिढ़ाया है, वह है लोगों का सुशोभित तरीके से बोलना।" इस वजह से, मैंने अत्यधिक विश्वास को महसूस किया, यह सोचकर कि इस सम्बन्ध में मुझे कोई समस्या नहीं है। लेकिन केवल परमेश्वर के प्रकाशन के माध्यम से मुझे पता चला कि, सत्य में प्रवेश किये बिना या किसी के स्वभाव को बदले बिना, कोई भी किसी भी तरह से सही तरीके से नहीं बोल सकता।

परमेश्वर की इच्छा-सही मायने में एक अच्छे व्यक्ति का मानदंड

सही मायने में एक अच्छे व्यक्ति का मानदंड

मोरान लीन्यी शहर, शानडोंग प्रांत
जब से मैं एक बच्ची थी, मैंने हमेशा, दूसरे लोग मुझे कैसे देखते हैं और उनका मेरे लिए मूल्यांकन क्या है, इस बात को बहुत महत्व दिया। ताकि मैंने जो कुछ भी किया उसके लिए दूसरों से प्रशंसा प्राप्त कर सकूँ, जब भी कोई बात उठी, मैंने तब भी किसी से कोई तर्क नहीं किया, ताकि मेरी अच्छी छवि जो लोगों में मेरे लिए थी वह बनी रहे। अंत के दिनों में परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करने के बाद, मैंने इसी तरीके से काम किया, जैसी अच्छी छवि मेरे भाइयों और बहनों में मेरे लिए थी उसे जिस तरह भी संभव हो कायम रखा।इससे पहले, जब मैं कार्य-प्रभारी थी, मेरा नेता अक्सर कहता था कि मेरा प्रदर्शन एक "हाँ-कहने वाला व्यक्ति," की तरह था और ऐसा प्रदर्शन नहीं था जो सच्चाई को अभ्यास में लाता है। मैंने कभी इसे दिल पर नहीं लिया, बल्कि इसके विपरीत अगर अन्य लोगों ने मुझे एक अच्छे व्यक्ति के रूप में माना, तब मुझे संतुष्टि हुई।

न्याय क्या है-बदली किये जाने पर भावना

न्याय क्या है-बदली किये जाने पर भावना

यी रेन लेईव्यू शहर, शानडोंग प्रांत
कुछ समय पहले, जब कलीसिया ने एक नेता को बदल दिया, एक अवधारणा मेरे भीतर उठ खड़ी हुई, कलीसिया का कर्मियों के संशोधन का सिद्धांत मेरी समझ में नहीं आयाI मैं जो देख सकती थी, जो बहन बदली गई थी वह सच्चाई प्राप्त करने और सहभागिता करने में बहुत अच्छी थी, और भ्रष्टाचार के बारे में खुलकर अपने खुद के विचार रख सकती थीI इसलिए मैं कभी नहीं जान पाई कि जिसने सच्चाई के लिए इतना प्रयास किया उसे कैसे बदला जा सकता हैI क्या ऐसा इसलिए था कि उसने भ्रष्टाचार के बारे में अपने स्वयं के भाव प्रकट करते हुए बहुत कुछ कहा, और उसके नेता ने गलती से उसे वो माना जो सच्चाई के लिए प्रयास नहीं करते, और उसे बदल दिया? यदि यह वास्तव में हुआ था, तो जो सच्चाई को तलाश कर रहा था क्या उसके लिए प्रशिक्षण का अवसर बर्बाद नहीं हो जाएगा?