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"वह जिसका हर चीज़ पर प्रभुत्व है" क्लिप - परमेश्वर का पृथ्वी पर आना और एक पाप बलि बनना

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अनुग्रह के युग में, प्रभु यीशु लोगों के बीच आया और उन्हीं की खातिर उसे सूली पर चढ़ाया गया। उसने लोगों को व्य्वस्था के बंधन से मुक्त किया और पापबलि के कारण इंसान ने प्रभु के प्रेम और दया का आनंद लिया.... प्रभु के आगमन के कारण इंसान का पदार्पण एक नए युग में हुआ। इसी दौरान, इससे परमेश्वर और इंसान के रिश्ते बेहतर हुए और इंसानों के बीच परमेश्वर के प्रबंधन कार्य के लिए एक नई शुरुआत, एक नया सूत्रपात हुआ।

सम्बन्धित सामग्री: अब अंत के दिन है, यीशु मसीह का दूसरा आगमन की भविष्यवाणियां मूल रूप से पूरी हो चुकी हैं। तो हम किस प्रकार बुद्धिमान कुंवारी बने जो प्रभु का स्वागत करते हैं? जवाब जानने के लिए अभी पढ़ें और देखें।


Best Hindi Christian Movie | Chronicles of Religious Persecution in China "निर्वासन का लम्बा रास्ता"

Best Hindi Christian Movie | Chronicles of Religious Persecution in China "निर्वासन का लम्बा रास्ता"

वर्ष 1949 में मेनलैण्ड चीन में सत्ता में आने के बाद से, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी धार्मिक आस्था का निरंतर उत्पीड़न करने में लगी रही है। पागलपन में यह ईसाइयों को बंदी बना चुकी है और उनकी हत्या कर चुकी है, चीन में काम कर रहे मिशनरियों को निष्काषित कर चुकी है और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा चुका है, बाइबल की अनगिनत प्रतियां जब्त कर जला दी गयीं हैं, कलीसिया की इमारतों को सीलबंद कर दिया गया है और ढहाया जा चुका है, और सभी गृह कलीसिया को जड़ से उखाड़ फैंकने का प्रयास किया जा चुका है।... यह वृत्तचित्र चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा सताए गये एक चीनी ईसाई, येंग जींगेन की सच्ची कहानी सुनाता है।

परमेश्वर की इच्छा-परमेश्वर की सेवा करते समय नई चालाकियाँ मत ढूँढो

परमेश्वर की सेवा करते समय नई चालाकियाँ मत ढूँढो

हेयी झुआंघे सिटी, लिआओनिंग प्रांत
मुझे अभी-अभी कलीसिया के अगुआ का उत्तरदायित्व लेने के लिए पदोन्नत किया गया था। लेकिन कुछ अवधि तक की कठिन मेहनत के बाद, न केवल कलीसिया का इंजील का कार्य फीका पड़ गया था, बल्कि इंजील दल में मौजूद मेरे सभी भाई-बहन भी नकारात्मकता और कमज़ोरी में जी रहे थे। इस परिस्थिति का सामना करके, मैं अपनी भावनाओं को नियंत्रित नहीं रख सकी।

41. परमेश्वर का प्रेम की प्रकृति क्या है?

41. परमेश्वर का प्रेम की प्रकृति क्या है?

सिकियू, सुईहुआ सिटी, हीलॉन्ग जिआंग प्रदेश
जब भी मैं परमेश्वर के वचन का यह अवतरण पढ़ता हूं, “यदि तुम हमेशा मेरे प्रति बहुत निष्ठावान और प्यार करने वाले रहे हो, मगर तुम बीमारी, जीवन की बाधाओं, और अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के परित्याग की पीड़ा को भुगतते हो और जीवन में किसी भी अन्य दुर्भाग्य को सहन करते हो, तो क्या तब भी मेरे लिए तुम्हारी निष्ठा और प्यार जारी रहेगा?” (“वचन देह में प्रकट होता है” से “एक बहुत गंभीर समस्या: विश्वासघात (2)” से)

1. बचाया जाना क्या है? उद्धार क्या है?

बचाया जाना क्या है? उद्धार क्या है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"जो विश्‍वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा, परन्तु जो विश्‍वास न करेगा वह दोषी ठहराया जाएगा" (मरकुस 16:16)।
"क्योंकि यह वाचा का मेरा वह लहू है, जो बहुतों के लिये पापों की क्षमा के निमित्त बहाया जाता है" (मत्ती 26:28)।
"जो मुझ से, 'हे प्रभु! हे प्रभु!' कहता है, उनमें से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है" (मत्ती 7:21)।

10. परमेश्वर का प्रेम सर्वाधिक यथार्थ है

परमेश्वर का प्रेम सर्वाधिक यथार्थ है

वेंझोंग बीजिंग शहर
11 अगस्त 2012
21 जुलाई 2012 की रात को हमारे यहाँ एक भयावह बाढ़ आई थी। इस प्रकार की दुर्घटनाएं कभी कभी ही घटित होती है। मैंने इस दुर्घटना के दौरान क्या अनुभव किया और मैंने क्या देखा; उन सभी लोगों को बताना चाहती हूँ जो लोग परमेश्वर के लिए लालायित रहते हैं।

8. यह कैसे समझें कि मसीह सत्य, मार्ग और जीवन है?

परमेश्वर ने आपदा से हमारे परिवार की रक्षा की

वैंग लैन, बीजिंग
6 अगस्त, 2012
21 जुलाई 2012 को, साठ वर्षों में सबसे बड़ी बाढ़ ने हमारे गांव को तहस—नहस कर दिया। यह आपदा स्वर्ग से गिरी थी, बाढ़ के पानी में मिट्टी और पत्थर मिश्रित थे एवं इसने पूरे गांव को तबाह कर दिया था। अधिकांश घरों को पानी व कीचड़ के भूस्खलन ने नष्ट कर दिया था।

7. आपदाओं के बीच मैंने परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव देखा

आपदाओं के बीच मैंने परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव देखाली जिंग, बीजिंग7 अगस्त, 2017

उस दिन, सुबह से बारिश होना शुरू हो गई थी। मैं एक भाई के घर में सभा में गई थी, इसी दौरान बारिश अधिक से अधिक तेज होती जा रही थी। दोपहर तक यह ऐसे बरसने लगी जैसे सीधे स्वर्ग से ही गिर रही हो। हमारी सभा के खत्म होने के समय तक, बारिश का पानी मेरे भाई के बरामदे में घुस गया था, लेकिन चूंकि मैं अपने परिवार के लिए चिंतित थी, इसलिए मैं अपने घर की ओर जाने के लिए संघर्ष करने लगी। आधे रास्ते तक पहुंचने पर, कुछ लोग खतरे से निकलकर भागते हुए मेरे पास आए और कहा, "क्या तुम भाग नहीं रही हो, क्या तुम अब भी घर जा रही हो?"

1. सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने मुझे जिंदगी में दूसरा मौका दिया है

सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने मुझे जिंदगी में दूसरा मौका दिया है

दो साधारण भाई व बहन, बीजिंग
15 अगस्त, 2012
मेरे लिए 21 जुलाई 2012 सबसे अविस्मरणीय दिन था, साथ ही साथ मेरी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण दिन भी।
उस दिन, बीजिंग में फांगशान जिले में भारी बारिश हो रही थी, सबसे भारी बारिश जो हमने इकसठ सालों में वहां देखी थी। शाम 4 बजे के थोड़ी देर बाद, मैं यूं ही नज़र डालने के लिए सड़क की ओर गया और देखा कि सब ओर पानी था।

सत्य का अभ्यास करने का अनुभव

 सत्य का अभ्यास करने का अनुभव

बहन हेंगसिन ज़ूजोऊ शहर, हुनान प्रांत
बहुत पहले की बात नहीं है, मैं ने "जीवन में प्रवेश के विषय में संगति और प्रचार" सुना, जिसने यह समझने हेतु मेरी अगुवाई की कि केवल ऐसे लोग जो सत्य का अभ्यास करते हैं वे ही उस सत्य को प्राप्त कर सकते हैं और अन्ततः ऐसे मनुष्य बन सकते हैं जो सत्य एवं मानवता को धारण करते हैं और इस प्रकार परमेश्वर की स्वीकृति हासिल करते हैं। तब से, मैं ने अपने दैनिक जीवन में अपने शरीर को त्यागने और सच्चाई का अभ्यास करने के लिए एक सचेत प्रयास किया। कुछ समय पश्चात्, मुझे प्रसन्नता से पता लगा कि मैं कुछ सच्चाई का अभ्यास कर सकती हूँ।

जो कुछ परमेश्वर कहता है वह ही मनुष्य का न्याय है

जो कुछ परमेश्वर कहता है वह ही मनुष्य का न्याय हैबहन शुन्किउ नानयांग शहर, हेनान प्रांत

मैं सोचा करती थी कि परमेश्वर केवल तभी मनुष्य का न्याय एवं उसकी ताड़ना करता है जब वह मनुष्य के अंतर्निहित भ्रष्टाचार को प्रकट करता है या कठोर वचनों को सूचित करता है जो मनुष्य के अंत का फैसला करते है। यह तो सिर्फ काफी बाद में हुआ कि किसी घटना ने यह एहसास करने में मेरी अगुवाई की कि परमेश्वर के कोमल वचन भी उसके न्याय एवं ताड़ना थे। मुझे एहसास हुआ कि हर एक वचन जिसे परमेश्वर ने बोला वह मनुष्य के प्रति उसका न्याय था।

सर्वोत्कृष्ट उपहार जो परमेश्वर ने मुझे दिया है

सर्वोत्कृष्ट उपहार जो परमेश्वर ने मुझे दिया है

यिक्ज़िन शिजिएजुआंग शहर, हेबेई प्रान्त
इससे पहले, मैं बार-बार अपने भाइयों एवं बहनों को यह कहते हुए सुनती थी कि, "परमेश्वर जो कुछ भी करता है वह बहुत अच्छे के लिए होता है; यही वह सब है जिसकी लोगों को आवश्यकता है। मैंने इसे स्वीकार किया और इसके साथ सहमत थी, लेकिन मेरे स्वयं के अनुभव के माध्यम से मुझे कोई समझ नहीं थी। बाद में मुझे उसे बातावरण के जरिए इसकी कुछ समझ प्राप्त हुई जिसे परमेश्वर ने मेरे लिए सृजित किया था।

देहधारण क्या है? देहधारण का सार क्या है?

देहधारण क्या है? देहधारण का सार क्या है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
पहला देहधारी परमेश्वर पृथ्वी पर साढ़े तैंतीस साल रहा, फिर भी उसने अपनी सेवकाई को उन सालों में से केवल साढ़े तीन साल तक ही किया। अपना कार्य करने के दौरान और अपना कार्य आरम्भ करने से पहले, इन दोनों समयों में, वह अपनी सामान्य मानवता को धारण किए हुए था। वह अपनी साधारण मानवता में साढ़े तैंतीस साल तक रहा। पूरे साढ़े तीन साल तक उसने अपने आप को देहधारी परमेश्वर के रूप में प्रकट किया।

परमेश्वर के न्याय और ताड़ना के कार्य का महत्व।

परमेश्वर के न्याय और ताड़ना के कार्य का महत्व।
परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
अंत के दिनों का कार्य, सभी को उनके स्वभाव के आधार पर अलग करना, परमेश्वर की प्रबंधन योजना का समापन करना है, क्योंकि समय निकट है और परमेश्वर का दिन आ पहुँचा है। जिन्होंने उसके राज्य में प्रवेश कर लिया है अर्थात्, वे सभी लोग जो अंत तक उसके वफादार रहे हैं, परमेश्वर उन सभी को स्वयं परमेश्वर के युग में ले जाता है। हालाँकि स्वयं परमेश्वर के युग के आने से पहले परमेश्वर जो कार्य करने की इच्छा रखता है वह मनुष्य के कर्मों को देखना या मनुष्य जीवनों के बारे में पूछताछ करना नहीं है, बल्कि उनके विद्रोह का न्याय करना है, क्योंकि परमेश्वर अपने सिंहासन के सामने आने वाले सभी लोगों को शुद्ध करेगा।

परमेश्वर के वचनों के कार्य का महत्व।

परमेश्वर के वचनों के कार्य का महत्व।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
राज्य के युग में, परमेश्वर नए युग की शुरूआत करने, अपने कार्य के साधन बदलने, और संपूर्ण युग में काम करने के लिये अपने वचन का उपयोग करता है। वचन के युग में यही वह सिद्धांत है, जिसके द्वारा परमेश्वर कार्य करता है। वह देहधारी हुआ ताकि विभिन्न दृष्टिकोणों से बातचीत कर सके, मनुष्य वास्तव में परमेश्वर को देख सके, जो देह में प्रकट होने वाला वचन है, और उसकी बुद्धि और आश्चर्य को जान सके। उसने यह कार्य इसलिए किये ताकि वह मनुष्यों को जीतने, उन्हें पूर्ण बनाने और ख़त्म करने के लक्ष्यों को बेहतर ढंग से हासिल कर सके।

72. मैंने दूसरों के साथ काम करना सीखा

मैंने दूसरों के साथ काम करना सीखा

ल्यू हेंग यांग्सी प्रांत
परमेश्वर के अनुग्रह और उत्कर्ष से, मैंने कलीसिया का अगुआ होने का उत्तरदायित्व लिया। उस समय, मैं बहुत उत्साहित थी और मैंने परमेश्वर के समक्ष एक संकल्प निर्धारित किया था: चाहे मैं किसी भी चीज़ का सामना क्यों न करूँ, मैं अपने उत्तरदायित्वों का त्याग नहीं करूँगी। मैं दूसरी बहन के साथ अच्छी तरह से काम करूँगी और एक ऐसी व्यक्ति बनूँगी जो सत्य का अनुसरण करने का प्रयास करती है। किन्तु मैंने केवल संकल्प ही लिया था, और नहीं जानती था कि एक सामंजस्यपूर्ण कामकाजी रिश्ते की वास्तविकता में कैसे प्रवेश कहूँ।

73. मैं फरीसियों के मार्ग पर क्यों चली गई हूँ?

मैं फरीसियों के मार्ग पर क्यों चली गई हूँ?

सुज़िंग शांग्ज़ी प्रांत
मैं एक घमण्डी और अकडू व्यक्ति हूँ, और पद मेरी कमज़ोरी रहा है। कई वर्षों से मैं प्रतिष्ठा और पद से बँधी रही हूँ और मैं स्वयं को इससे स्वतन्त्र करने में समर्थ नहीं हुई हूँ। बार-बार मुझे पदोन्नत और स्थानान्तरित किया गया है; मुझे मेरे पद में अनेक असफलताएँ मिली हैं और मार्ग में अनेक धक्के लगे हैं। अनेक वर्षों तक निपटाए जाने और शुद्ध किए जाने के पश्चात्, मुझे महसूस होता था कि मैं अपने पद को गम्भीरता से नहीं ले रही हूँ।

अंततः मैं एक मनुष्य की तरह थोड़ा जीवन व्यतीत करता हूँ

अंततः मैं एक मनुष्य की तरह थोड़ा जीवन व्यतीत करता हूँ

ज़ियांग वांग सिचुआन प्रांत
मैं हर बार अपने हृदय की गहराई से ताड़ना महसूस करता हूँ, जब भी मैं देखता हूँ कि परमेश्वर के वचन कहते हैं कि: "क्रूर, निर्दयी मानवजाति! साँठगाँठ और साज़िश, आपस में धक्का-मुक्की, सम्मान और संपत्ति के लिए छीनाझपटी, एक-दूसरे का कत्ल करना-आखिर ये सब कब समाप्त होगा? परमेश्वर ने लाखों वचन कहे हैं, तब भी किसी को अभी तक अक़्ल नहीं आई है। वे अपने परिवार, और बेटों और बेटियों के वास्ते, आजीविका, हैसियत, अभिमान, और पैसों के लिए, कपड़ों के वास्ते, भोजन और देह क्रिया करते हैं-किसकी क्रियाएँ वास्तव में परमेश्वर के लिए हैं?

एक आध्यात्मिक पुनर्जन्म

एक आध्यात्मिक पुनर्जन्म

याँग झेंग हीलोंगजियाँग प्रांत
मैं एक गरीब ग्रामीण परिवार में पैदा हुआ था जो अपनी सोच में पिछड़ा हुआ था। मैं छोटी उम्र से ही घमंडी था और हैसियत की मेरी इच्छा विशेष रूप से प्रबल थी। समय के साथ, सामाजिक प्रभाव और पारंपरिक शिक्षा के माध्यम से, मैंने जीवित रहने के लिए शैतान के सभी प्रकार के नियमों को अपने हृदय में धारण कर लिया था।

परमेश्वर का कार्य कितना ज्ञानपूर्ण है!

परमेश्वर का कार्य कितना ज्ञानपूर्ण है!

शिजी मा एंशन शहर, एन्हुइ प्रांत
कलीसिया में एक अगुआ के रूप में काम करने के मेरे समय के दौरान, मेरा अगुआ अक्सर ही हमारे लिए सबक के रूप में काम आने के लिए दूसरों की असफलताओं के उदाहरण साझा किया करता था। उदाहरण के लिए: कुछ अगुआ केवल पत्रों और सिद्धांतों की बातें करते थे लेकिन अपनी खुद की भ्रष्टता का उल्लेख करने या वास्तविकता के साथ सत्य को कैसे लागू किया जाए इस बारे में अपनी समझ के संबंध में संगति करने में असफल रहते थे।