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तुम सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर को कैसे बता सकते हो?

तुम सच्चे मसीह और झूठे मसीहों के बीच अंतर को कैसे बता सकते हो?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर देहधारी हुआ और मसीह कहलाया, और इसलिए वह मसीह, जो लोगों को सत्य दे सकता है, परमेश्वर कहलाता है। इसके बारे में और कुछ भी अधिक कहने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह परमेश्वर के तत्व को स्वयं में धारण किए रहता है, और अपने कार्य में परमेश्वर के स्वभाव और बुद्धि को धारण करता है, और ये चीजें मनुष्य के लिये अप्राप्य हैं। जो अपने आप को मसीह कहते हैं, फिर भी परमेश्वर का कार्य नहीं कर सकते, वे सभी धोखेबाज़ हैं।

देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं।

5.देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
देहधारण का महत्व यह है कि वह साधारण, सामान्य मनुष्य परमेश्वर स्वयं के कार्यों को करता है; अर्थात्, कि परमेश्वर अपने दिव्य कार्य को मानवता में करता है और उसके द्वारा शैतान को परास्त करता है। देहधारण का अर्थ है कि परमेश्वर का आत्मा देह बन जाता है, अर्थात्, परमेश्वर देह बन जाता है; जो कार्य वह देह में करता है वह पवित्रात्मा का कार्य होता है, जो देह में प्राप्त होता है, देह द्वारा अभिव्यक्त होता है।

भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है

भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है

(परमेश्वर के वचन का चुना गया अवतरण)
भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है
परमेश्वर ने देहधारण किया क्योंकि शैतान का आत्मा, या कोई अभौतिक चीज़ उसके कार्य का विषय नहीं है, परन्तु मनुष्य है, जो शरीर से बना है और जिसे शैतान के द्वारा भ्रष्ट किया गया है। निश्चित रूप से चूँकि मनुष्य की देह को भ्रष्ट किया गया है इसलिए परमेश्वर ने हाड़-मांस के मनुष्य को अपने कार्य का विषय बनाया है; इसके अतिरिक्त, क्योंकि मनुष्य भ्रष्टता का विषय है, उसने मनुष्य को अपने उद्धार के कार्य के समस्त चरणों के दौरान अपने कार्य का एकमात्र विषय बनाया है।

देहधारी परमेश्वर के कार्य और पवित्रात्मा के कार्य के बीच में क्या अंतर है?

देहधारी परमेश्वर के कार्य और पवित्रात्मा के कार्य के बीच में क्या अंतर है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
यद्यपि देह में किए गए परमेश्वर के कार्य में अनेक अकल्पनीय मुश्किलें शामिल होती हैं, फिर भी वे प्रभाव जिन्हें वह अंततः हासिल करता है वे उन कार्यों से कहीं बढ़कर होते हैं जिन्हें आत्मा के द्वारा सीधे तौर पर किया जाता है। देह के कार्य में काफी कठिनाईयां साथ में जुड़ी होती हैं, और देह आत्मा के समान वैसी ही बड़ी पहचान को धारण नहीं कर सकता है, और आत्मा के समान उन्हीं अलौकिक कार्यों को क्रियान्वित नहीं कर सकता है, और वह आत्मा के समान उसी अधिकार को तो बिलकुल भी धारण नहीं कर सकता है।

तुम्हें परमेश्वर देह बना के महत्व को अवश्य जानना चाहिए।

तुम्हें परमेश्वर देह बना के महत्व को अवश्य जानना चाहिए।

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
इस बार, परमेश्वर कार्य करने आत्मिक देह में नहीं, बल्कि एक एकदम साधारण देह में आया है। यह न केवल परमेश्वर के दूसरी बार देहधारण की देह है, बल्कि यह वही देह है जिसमें वह लौटकर आया है। यह बिलकुल साधारण देह है। इस देह में दूसरों से अलग कुछ भी नहीं है, परंतु तुम उससे वह सत्य ग्रहण कर सकते हो जिसके विषय में तुमने पहले कभी नहीं सुना होगा। यह तुच्छ देह, परमेश्वर के सभी सत्य-वचन का मूर्त रूप है, जो अंत के दिनों में परमेश्वर का काम करती है, और मनुष्यों के जानने के लिये यही परमेश्वर के संपूर्ण स्वभाव की अभिव्यक्ति है।

देहधारण क्या है? देहधारण का सार क्या है?

देहधारण क्या है? देहधारण का सार क्या है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
पहला देहधारी परमेश्वर पृथ्वी पर साढ़े तैंतीस साल रहा, फिर भी उसने अपनी सेवकाई को उन सालों में से केवल साढ़े तीन साल तक ही किया। अपना कार्य करने के दौरान और अपना कार्य आरम्भ करने से पहले, इन दोनों समयों में, वह अपनी सामान्य मानवता को धारण किए हुए था। वह अपनी साधारण मानवता में साढ़े तैंतीस साल तक रहा। पूरे साढ़े तीन साल तक उसने अपने आप को देहधारी परमेश्वर के रूप में प्रकट किया।

अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य किस तरह मानवजाति को शुद्ध करता और बचाता है?

III. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय के कार्य से सम्बंधित सच्चाई के पहलू पर हर किसी को अवश्य गवाही देनी चाहिए

3. अंतिम दिनों में परमेश्वर के न्याय का कार्य किस तरह मानवजाति को शुद्ध करता और बचाता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता; क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूँ। जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा" (युहन्ना 12:47-48)।

अंत के दिनों में परमेश्वर का कार्य आत्मा के माध्यम से क्यों नहीं किया जाता है? परमेश्वर अपना कार्य करने के लिए देह में क्यों आ गया है?

अंत के दिनों में परमेश्वर का कार्य आत्मा के माध्यम से क्यों नहीं किया जाता है? परमेश्वर अपना कार्य करने के लिए देह में क्यों आ गया है?

परमेश्वर के द्वारा मनुष्य को सीधे तौर पर पवित्रात्मा के साधनों के माध्यम से या आत्मा के रूप में बचाया नहीं जाता है, क्योंकि उसके आत्मा को मनुष्य के द्वारा न तो देखा जा सकता है और न ही स्पर्श किया जा सकता है, और मनुष्य के द्वारा उस तक पहुँचा नहीं जा सकता है। यदि उसने आत्मा के तरीके से सीधे तौर पर मनुष्य को बचाने का प्रयास किया होता, तो मनुष्य उसके उद्धार को प्राप्त करने में असमर्थ होता।

67. प्रभु की वापसी में देहधारण क्यों शामिल है—गुप्त रूप से अवरोहण—साथ ही साथ सार्वजनिक रूप से बादलों से अवरोहण?

67. प्रभु की वापसी में देहधारण क्यों शामिल है—गुप्त रूप से अवरोहण—साथ ही साथ सार्वजनिक रूप से बादलों से अवरोहण?

उत्तर परमेश्वर के वचन से:
परमेश्वर चीन की मुख्य भूमि में देहधारण किया है, जिसे हांगकांग और ताइवान में हमवतन के लोग अंतर्देशीय कहते हैं। जब परमेश्वर ऊपर से पृथ्वी पर आया, तो स्वर्ग और पृथ्वी में कोई भी इसके बारे में नहीं जानता था, क्योंकि यही परमेश्वर का एक गुप्त अवस्था में लौटने का वास्तविक अर्थ है। वह लंबे समय तक देह में कार्य करता और रहता रहा है, फिर भी इसके बारे में कोई भी नहीं जानता है।

भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है

भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है

(परमेश्वर के वचन का चुना गया अवतरण)
भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है
परमेश्वर ने देहधारण किया क्योंकि शैतान का आत्मा, या कोई अभौतिक चीज़ उसके कार्य का विषय नहीं है, परन्तु मनुष्य है, जो शरीर से बना है और जिसे शैतान के द्वारा भ्रष्ट किया गया है। निश्चित रूप से चूँकि मनुष्य की देह को भ्रष्ट किया गया है इसलिए परमेश्वर ने हाड़-मांस के मनुष्य को अपने कार्य का विषय बनाया है; इसके अतिरिक्त, क्योंकि मनुष्य भ्रष्टता का विषय है, उसने मनुष्य को अपने उद्धार के कार्य के समस्त चरणों के दौरान अपने कार्य का एकमात्र विषय बनाया है।

यह क्यों कहा जाता है कि भ्रष्ट मानव जाति को देह बने परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है?

I. परमेश्वर के देह-धारण से सम्बंधित सत्य के पहलू पर हर किसी को गवाही देनी चाहिए

6. यह क्यों कहा जाता है कि भ्रष्ट मानव जाति को देह बने परमेश्वर के उद्धार की अधिक आवश्यकता है?
(परमेश्वर के वचन का चुना गया अवतरण)

भ्रष्ट मानवजाति को देह धारण किए हुए परमेश्वर के उद्धार की अत्यधिक आवश्यकता है

परमेश्वर ने देहधारण किया क्योंकि शैतान का आत्मा, या कोई अभौतिक चीज़ उसके कार्य का विषय नहीं है, परन्तु मनुष्य है, जो शरीर से बना है और जिसे शैतान के द्वारा भ्रष्ट किया गया है।

देह-धारी परमेश्वर और जो परमेश्वर द्वारा उपयोग में लाए जाते हैं उन लोगों के बीच सारभूत अंतर क्या है?

प्रभु यीशु,व्यवस्था का युग,अनुग्रह का युग,राज्य का युग

5. देह-धारी परमेश्वर और जो परमेश्वर द्वारा उपयोग में लाए जाते हैं उन लोगों के बीच सारभूत अंतर क्या है?

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"मैं तो पानी से अथवा, में तुम्हें मन फिराव का बपतिस्मा देता हूँ, परन्तु जो मेरे बाद आने वाला है, वह मुझ से शक्‍तिशाली है; मैं उसकी जूती उठाने के योग्य नहीं। वह तुम्हें पवित्र आत्मा और आग से बपतिस्मा देगा" (मत्ती 3:11)।

अंतिम दिनों में अपने न्याय के कार्य को करने के लिए परमेश्वर मनुष्य का उपयोग क्यों नहीं करता, इसके बजाय उसे देह-धारण कर, स्वयं इसे क्यों करना पड़ता है


अंतिम दिनों के मसीह,वचन देह में प्रकट होता है
सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया-परमेश्वर के देह-धारण से सम्बंधित सत्य के पहलू पर हर किसी को गवाही देनी चाहिए
4. अंतिम दिनों में अपने न्याय के कार्य को करने के लिए परमेश्वर मनुष्य का उपयोग क्यों नहीं करता, इसके बजाय उसे देह-धारण कर, स्वयं इसे क्यों करना पड़ता है?
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"जैसा पिता मरे हुओं को उठाता और जिलाता है, वैसा ही पुत्र भी जिन्हें चाहता है उन्हें जिलाता है" (युहन्ना 5:22)।
"वरन् उसे न्याय करने का भी अधिकार दिया है, इसलिये कि वह मनुष्य का पुत्र है" (युहन्ना 5:27)।

"वे कौन हैं जो वापस आए हैं" (7) - मसीह के आसन के सामने न्याय का अनुभव करने के साक्ष्य


Hindi Christian Movie clip "वे कौन हैं जो वापस आए हैं" (7) - मसीह के आसन के सामने न्याय का अनुभव करने के साक्ष्य


यद्यपि हम एक बार परमेश्वर में विश्वास कर लें तो हम पाप-मुक्त कर दिए जाते हैं, लेकिन हम फिर भी पाप के बीच जीते हैं, प्रतिदिन पाप करते हैं फिर पापों को स्वीकार करते हैं और सभी उस समय के लिये तड़पते हैं जब हम अब और कोई पाप नहीं करेंगे या परमेश्वर की अवहेलना नहीं करेंगे। अंत के दिनों में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर हमारे शैतानी स्वभाव और पापी प्रकृति का समाधान करने के लिए अपना न्याय का कार्य करता है। सुनो! सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाई-बहन परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना से गुज़रने की अपनी गवाहियों को और इस बात को साझा कर रहे हैं कि किस प्रकार इसने उनके स्वभावों को रूपांतरित कर दिया है।

"वे कौन हैं जो वापस आए हैं" (2) - सच्चे मसीह और झूठे मसीहों में अंतर कैसे करें 2


Hindi Christian Movie clip "वे कौन हैं जो वापस आए हैं" (2) - सच्चे मसीह और झूठे मसीहों में अंतर कैसे करें 2


बहुत से लोग अब गवाही देते हैं कि प्रभु यीशु सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में लौट आया है और वर्तमान में परमेश्वर के घर से आरंभ होने वाला अपना न्याय का कार्य कर रहा है।

Hindi Christian Video "बाइबल से बाहर निकलें" (2) - क्या हम बाइबल से बंधे रहकर अनंत जीवन पा सकते हैं?



Hindi Christian Video clip "बाइबल से बाहर निकलें" (2) - क्या हम बाइबल से बंधे रहकर अनंत जीवन पा सकते हैं?


अंत के दिनों में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपना न्याय का कार्य करते हैं, और अनंत जीवन का मार्ग लेकर आते हैं, और अंत के दिनों के मसीह द्वारा व्यक्त सत्य को स्वीकार करके ही हम अनंत जीवन पा सकते हैं। फिर भी धार्मिक दुनिया के पादरी और एल्डर्स कहते हैं कि जीवन बाइबल के भीतर ही है, और जब तक हम बाइबल से जुड़े रहेंगे हम अनंत जीवन को पा सकेंगे।

Hindi Christian Video clip "भक्ति का भेद" (5) - कैसे जाना जाए कि मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन हैं



Hindi Christian Video clip "भक्ति का भेद" (5) - कैसे जाना जाए कि मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन हैं


परमेश्वर के दो अवतार, दोनों सी बात की गवाही देते हैं कि "मसीह ही सत्य, मार्ग और जीवन हैं।" ऐसा क्यों कहा जाता है कि मसीह सत्य, मार्ग और जीवन हैं? और जिन प्रेरितों और महान आध्यात्मिक लोगों ने प्रभु यीशु का अनुसरण किया था, उन्होंने भी कई बातें कही थी, ऐसी बातें जो मनुष्य के लिए काफी फायदे की हैं, तो फिर वे सत्य, मार्ग और जीवन क्यों नहीं हैं? इन दोनों पहलुओं के बीच अंतर को हम कैसे समझें?

Hindi Christian Video "भक्ति का भेद" (2) - जब प्रभु लौटेंगे तो क्या वे मनुष्यों को प्रकटन देंगे?



Hindi Christian Video clip "भक्ति का भेद" (2) - जब प्रभु लौटेंगे तो क्या वे मनुष्यों को प्रकटन देंगे?


कई धार्मिक पादरियों और एल्डर्स ने, क्योंकि उन्होंने कई वर्षों से परमेश्वर पर विश्वास किया है, हमेशा परमेश्वर के लिए कड़ी मेहनत से कार्य किया है और प्रभु की वापसी की प्रतीक्षा करते हुए काफी सतर्क रहे हैं, उनका मानना है कि जब प्रभु आएंगे तो वे निश्चित रूप से उन्हें प्रकटन देंगे।

Hindi Christian Video clip "भक्ति का भेद" (1) - मनुष्य के पुत्र के आने का रहस्य



Hindi Christian Video clip "भक्ति का भेद" (1) - मनुष्य के पुत्र के आने का रहस्य


प्रभु की वापसी की बात करते हुए, प्रभु यीशु ने कहा, "तुम भी तैयार रहो; क्योंकि जिस घड़ी तुम सोचते भी नहीं, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा"। "क्योंकि जैसे बिजली आकाश के एक छोर से कौंध कर आकाश के दूसरे छोर तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य का पुत्र भी अपने दिन में प्रगट होगा। परन्तु पहले अवश्य है कि वह बहुत दुःख उठाए, और इस युग के लोग उसे तुच्छ ठहराएँ "(लूका 17: 24-25)। इन भविष्यवाणियों में "मनुष्यों का पुत्र आया है" या "मनुष्य के पुत्र के आगमन" का उल्लेख किया गया है, तो "मनुष्य के पुत्र के आगमन" का क्या मतलब है? किस तरह से प्रभु यीशु वापस लौटेंगे? यह छोटी फिल्म आपको सत्य का खुलासा करेगी।

कलिसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचन "देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं"



कलिसियाओं के लिए पवित्र आत्मा के वचन "देहधारण के महत्व को दो देहधारण पूरा करते हैं"


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "विश्व के सृजन के बाद से परमेश्वर के आत्मा ने इतना महान कार्य किया है; उसने विभिन्न युगों के दौरान, और भिन्न-भिन्न देशों में भिन्न-भिन्न कार्य किए हैं।