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6. बाइबल के साथ वास्तव में कैसे पेश आना चाहिए और उसका उपयोग किस तरह से करना चाहिए कि वह परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हो? बाइबल का मूलभूत मूल्य क्या है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
आज, मैं इस रीति से बाइबल की चीरफाड़ कर रहा हूँ और इसका अर्थ यह नहीं है कि मैं इस से नफरत करता हूँ, या सन्दर्भ के लिए इसके मूल्य को नकारता हूँ। अंधकार में रखे जाने से तुम्हें रोकने के लिए मैं तुम्हारे लिए बाइबल के अंतर्निहित मूल्यों और इसकी उत्पत्ति की व्याख्या कर रहा हूँ। क्योंकि बाइबल के बारे में लोगों के अनेक दृष्टिकोण हैं, और उनमें से अधिकांश ग़लत हैं; इस तरह से बाइबल पढ़ना न केवल उन्हें उन चीज़ों को प्राप्त करने से रोकता है जो उन्हें प्राप्त करनी चाहिए, बल्कि, अधिक महत्वपूर्ण यह है, कि यह उस कार्य में भी बाधा डालता है जिसे करने का मैं इरादा करता हूँ।

4. बाइबल में अनन्त जीवन का कोई मार्ग नहीं है; यदि मनुष्य बाइबल को थामे रहता है और उसकी आराधना करता है, तो वह अनन्त जीवन को प्राप्त नहीं करेगा।

बाइबल में अनन्त जीवन का कोई मार्ग नहीं है; यदि मनुष्य बाइबल को थामे रहता है और उसकी आराधना करता है, तो वह अनन्त जीवन को प्राप्त नहीं करेगा।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, या ढूँढ़ो क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते" (युहन्ना 5:39-40)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता" (युहन्ना 14:6)।

3. बाइबल मनुष्य द्वारा संकलित की गई थी, परमेश्वर द्वारा नहीं; बाइबल परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती।

 बाइबल मनुष्य द्वारा संकलित की गई थी, परमेश्वर द्वारा नहीं; बाइबल परमेश्वर का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती।
संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"तुम पवित्रशास्त्र में ढूँढ़ते हो, क्योंकि समझते हो कि उसमें अनन्त जीवन तुम्हें मिलता है; और यह वही है जो मेरी गवाही देता है; फिर भी तुम जीवन पाने के लिये मेरे पास आना नहीं चाहते" (युहन्ना 5:39-40)।
"मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता" (युहन्ना 14:6)।

2. धार्मिक दुनिया का मानना है कि सभी शास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से दिए गए हैं और ये सब परमेश्वर के ही वचन हैं; इस कथन के प्रति हर किसी को क्या विवेक रखना चाहिए?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
बाइबल की हर चीज़ परमेश्वर के द्वारा व्यक्तिगत रूप से बोले गए वचनों का लिखित दस्तावेज़ नहीं है। बाइबल सामान्यतः परमेश्वर के कार्य की पिछली दो अवस्थाओं का आलेख करती है, उसमें से एक भाग है जो पैग़म्बरों की भविष्यवाणियों का लिखित दस्तावेज़ है, और एक भाग वह अनुभव और ज्ञान है जिन्हें युगों के दौरान उन लोगों के द्वारा लिखा गया था जिन्हें परमेश्वर के द्वारा इस्तेमाल किया गया था। मानवीय अनुभवों को मानवीय अनुमानों और ज्ञान के साथ दूषित किया गया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

1. बाइबल केवल व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग में परमेश्वर के कार्य के दो चरणों का एक आलेख (रिकॉर्ड) है; यह परमेश्वर के कार्य की संपूर्णता का आलेख नहीं है।

संदर्भ के लिए बाइबल के पद:
"मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (युहन्ना 16:12-13)।
"जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है" (प्रकाशितवाक्य 2:17)।
"देख, यहूदा के गोत्र का वह सिंह जो दाऊद का मूल है, उस पुस्तक को खोलने और उसकी सातों मुहरें तोड़ने के लिये जयवन्त हुआ है" (प्रकाशितवाक्य 5:5)।

1. परमेश्वर को जानना वास्तव में क्या है? क्या बाइबल की जानकारी और धार्मिक सिद्धांत को समझना, परमेश्वर को जानना माना जा सकता है?

परमेश्वर को जानना वास्तव में क्या है? क्या बाइबल की जानकारी और धार्मिक सिद्धांत को समझना, परमेश्वर को जानना माना जा सकता है?

परमेश्वर के प्रासंगिक वचन:
परमेश्वर को जानने का क्या अभिप्राय है? इसका अभिप्राय है कि मनुष्य परमेश्वर की भावनाओं के विस्तार को जानता है, परमेश्वर को जानना यही है। आप कहते हैं कि आपने परमेश्वर को देखा है, फिर भी आप परमेश्वर की भावनाओं के विस्तार को नहीं जानते हैं, उनके स्वभाव को नहीं जानते हैं, और उनकी धार्मिकता को भी नहीं जानते हैं। आपको उनकी दयालुता की कोई समझ नहीं है, और आप नहीं जानते हैं कि वे किससे घृणा करते हैं। इसे परमेश्वर को जानना नहीं कहा जा सकता है।

Hindi Christian Movie "वे कौन हैं जो वापस आए हैं" (4) - केवल परमेश्वर ही न्याय का कार्य कर सकता है


Hindi Christian Movie clip "वे कौन हैं जो वापस आए हैं" (4) - केवल परमेश्वर ही न्याय का कार्य कर सकता है

क्या आप जानते हैं कि परमेश्वर अंत के दिनों में अपना न्याय का कार्य इंसान का उपयोग करके करने के बजाय व्यक्तिगत रूप से देहधारण के माध्यम से क्यों करता है? इस छोटे से वीडियो आपको सही मार्ग दिखाया जाएगा।

परमेश्वर के कथन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (भाग दो)



परमेश्वर के कथन "परमेश्वर के कार्य के तीन चरणों को जानना ही परमेश्वर को जानने का मार्ग है" (भाग दो)


सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं: "कार्य के तीनों चरण परमेश्वर के प्रबंधन का मुख्य केन्द्र हैं और उनमें परमेश्वर का स्वभाव और वह क्या है व्यक्त होते हैं।

"शहर परास्त किया जाएगा" (5) - परमेश्वर के क्रोध के तहत धार्मिक बेबीलोन का पतन तय है


"शहर परास्त किया जाएगा" (5) - परमेश्वर के क्रोध के तहत धार्मिक बेबीलोन का पतन तय है



धार्मिक जगत सर्वशक्तिमान परमेश्वर का बेतहाशा विरोध और तिरस्कार करता है, अनगिनत दुष्कर्म करता है, और वह शैतान का ऐसा अड्डा बन गया है जो स्वयं को परमेश्वर के विरोध में रखता है। धार्मिक बेबीलोन के महान शहर की नियति यही है कि परमेश्वर के कोप के अधीन उसका पतन हो जाए। प्रकाशित-वाक्य की भविष्यवाणी है कि, "हे बड़े नगर, बेबीलोन! हे दृढ़ नगर, हाय! हाय! घड़ी भर में ही तुझे दण्ड मिल गया है" (प्रकाशितवाक्य 18:10)।

क्या बाइबल की व्याख्या करना परमेश्वर का गुणगान करने और उनके लिए गवाही देने के समान है?


क्या बाइबल की व्याख्या करना परमेश्वर का गुणगान करने और उनके लिए गवाही देने के समान है?


सम्पूर्ण धार्मिक संसार के बहुत से लोग यह मानते हैं कि वे जो बाइबल की व्याख्या करने में ज्यादा सक्षम हैं, ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर को जानते हैं, और यह कि अगर वे बाइबल की व्याख्या कर सकते हैं और भविष्यवाणियाँ भी समझा सकते हैं, तो वे ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप रहते हैं, और वे परमेश्वर की प्रशंसा करते और गवाही देते हैं।

"शहर परास्त किया जाएगा" (3) - फरीसियों के परमेश्वर का विरोध करने का सार क्या है?


"शहर परास्त किया जाएगा" (3) - फरीसियों के 

परमेश्वर का विरोध करने का सार क्या है?



दो हज़ार साल तक, हालांकि सभी विश्वासी इस तथ्य को जानते रहे हैं कि फरीसियों ने प्रभु यीशु को झुठलाया था, लेकिन पूरे धार्मिक संसार में कोई नहीं जानता कि फरीसियों के परमेश्वर को नकारने का मूल कारण और वास्तविक सार क्या था। सिर्फ अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के आगमन के साथ इस प्रश्न का सत्‍य ज़ाहिर हो सका है।

Hindi Gospel Movie "शहर परास्त किया जाएगा" (2) - पाखंडी फरीसियों को श्राप क्यों लगा है?


Hindi Gospel Movie "शहर परास्त किया जाएगा" (2) - पाखंडी फरीसियों को श्राप क्यों लगा है?


बाइबल में यह दर्ज है कि प्रभु यीशु ने फरीसियों को सात आपदाओं का श्राप दिया। आजकल, धार्मिक संसार के पादरी और एल्डर्स जिस मार्ग पर चल रहे हैं, वो फरीसियों का ही है और वे उसी तरह परमेश्वर की घृणा और अस्वीकृति से पीड़ित होंगे। तो फिर क्यों प्रभु यीशु ने फरीसियों को निन्दित और श्रापित किया?

"शहर परास्त किया जाएगा" (1) - धार्मिक संसार का पतन बेबीलोन शहर के रूप में हो गया है


"शहर परास्त किया जाएगा" (1) - धार्मिक संसार का पतन बेबीलोन शहर के रूप में हो गया है

धार्मिक संसार परमेश्वर के मार्ग से भटक जाता है और सांसारिक रुझानों का अनुसरण करने लगता है, वह चमकती पूर्वी बिजली की प्रचंड अवज्ञा और निंदा करने में सत्‍तारूढ़ शासन के साथ सहयोग करता है, और वह पहले ही परमेश्वर-विरोधी मार्ग पर चलना शुरू कर चुका है।

God’s Warning in the Last Days | Hindi Christian Movie | "शहर परास्त किया जाएगा" (Hindi Dubbed)

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ईसाई चेंग ह्युआइज़ चीन की एक गृह-कलीसिया में सहकर्मी हैं। वे अपनी कलीसिया को एक कारखाना खोलते हुए देखती हैं जिसमें पादरी विश्‍वासियों को सीसीपी सरकार को सौंपने के लिए थ्री-सेल्‍फ-कलीसिया में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं। चर्च के पादरी और एल्‍डर्स गोपनीय और ख़ुलेआम तरीकों से अपने व्‍यक्तिगत ओहदों और नाम के‍ लिए ईर्ष्‍यापूर्ण ढंग से संघर्ष करते हैं और कलीसिया को विभाजित कर देते हैं। चमकती पूर्वी बिजली का विरोध करने के लिए और विश्‍वासियों को उसका अध्‍ययन करने से रोकने के लिए वे सीसीपी सरकार के साथ भी गठजोड़ कर लेते हैं।

Hindi Gospel Movie Trailer | Is the Bible the Lord, or Is God? "मेरा प्रभु कौन है?"


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लियू झिझोंग चीन में एक स्थानीय कलीसिया के एल्डर हैं। वह 30 वर्षों से भी अधिक समय से एक विश्वासी रहे हैं, और उन्होंने निरंतर विश्वास किया है कि “बाइबल परमेश्वर से प्रेरित है,” “बाइबल परमेश्वर का प्रतिनिधित्व करती है, परमेश्वर में विश्वास करना बाइबल में विश्वास करना है, बाइबलमें विश्वास करना परमेश्वर में विश्वास करना है।” उनके हृदय में बाइबल सर्वोपरि है। बाइबिल में अपनी गहरी श्रद्धा और अटूट विश्वास के कारण, उन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंतिम दिनों के कार्य को देखने या समझने की मांग नहीं की है। एक दिन, जब उन्होंने विश्वासियों को सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को ऑनलाइन पढ़ने से रोक दिया, तो उनका सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया के उपदेशकों के साथ आमना-सामना हो गया । सत्य के बारे में गंभीर बहस के बाद, क्या वह अंततः बाइबल और परमेश्वर के बीच के रिश्ते को स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम थे? क्या वह बाइबल से हटकर यह समझने में सक्षम थे कि यीशु ही सत्य, मार्ग और जीवन है? क्या वह परमेश्वर के सामने स्वर्गारोहण किए जाएंगे?