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मानवता की नियति और विश्व की नियति सृष्टिकर्ता की संप्रभुता से अविभाज्य हैं



सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर कहते हैं: "सूक्ष्म स्तर पर, सभी पहाड़ियाँ, नदियाँ, झीलें, समुद्र और भू-भाग जिन्हें मनुष्य पृथ्वी पर देखता है, सभी मौसम जिन्हें वह अनुभव करता है, सभी चीज़ें जो पृथ्वी पर पाई जाती हैं, जिनमें पेड़-पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव और मनुष्य शामिल हैं, ये सभी परमेश्वर की संप्रभुता के अधीन हैं, और उन्हें परमेश्वर के द्वारा नियन्त्रित किया जाता है।"

स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VIII परमेश्वर सभी चीज़ों के लिए जीवन का स्रोत है (II)


सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर कहते हैं: "परमेश्वर ने मानवजाति के जीवित रहने की अनुकूलता को बढ़ाने हेतु मानव शरीर के सभी पहलुओं के लिए इन चीज़ों को किया है—देखना, सुनना, चखना, साँस लेना, एहसास करना ताकि वे सामान्य रूप से जी सकें और निरन्तर जी सकें। परमेश्वर के द्वारा बनाया गया ऐसा मौजूदा सजीव वातावरण ही वह सजीव वातावरण है जो मानवजाति के जीवित रहने के लिए सबसे अधिक उपयुक्त और हितकारी है। "
"स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है VIII" से

परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर


                                                                                                                                                                 
सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर कहते हैं: "जब से परमेश्वर ने मनुष्य को बनाया उस घड़ी से उसके पास उसके प्रति एक ज़िम्मेदारी है। उसकी ज़िम्मेदारी क्या है? उसे मनुष्य की सुरक्षा करनी है, और मनुष्य की देखभाल करनी है। वह आशा करता है कि मनुष्य भरोसा कर सकता है और उसके वचनों का पालन कर सकता है। यह मनुष्य से परमेश्वर की पहली अपेक्षा भी है।"
"परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I"से


     

परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है




सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर कहते हैं:"मैं सभी देशों, राष्ट्रों और यहाँ तक कि उद्योग के लोगों से विनती करता हूँ, कि परमेश्वर की आवाज़ को सुनें, परमेश्वर के कार्य को देखें, मानवजाति के भाग्य पर ध्यान दें, इस प्रकार परमेश्वर को सर्वाधिक पवित्र, सर्वाधिक सम्माननीय, मानवजाति के बीच आराधना का सर्वोच्च, और एकमात्र लक्ष्य बनाएँ और सम्पूर्ण मानवजाति को परमेश्वर के आशीष के अधीन जीवन जीने की अनुमति दें, ठीक उसी तरह से जैसे अब्राहम के वंशज यहोवा की प्रतिज्ञाओं के अधीन रहे थे और ठीक उसी तरह से जैसे आदम और हवा, जो मूल रूप से परमेश्वर के द्वारा बनाए गए थे, अदन के बगीचे में रहे थे।

परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है

सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर कहते हैं:"परमेश्वर ने इस संसार की सृष्टि की, उसने इस मानवजाति को बनाया, और इसके अलावा वह प्राचीन यूनानी संस्कृति और मानव सभ्यता का वास्तुकार था। केवल परमेश्वर ही इस मानवजाति को सांत्वना देता है, और केवल परमेश्वर ही रात-दिन इस मानवजाति का ध्यान रखता है।
मानव का विकास और प्रगति परमेश्वर की सम्प्रभुता से अवियोज्य है और मानवजाति का इतिहास और भविष्य परमेश्वर की योजनाओं में जटिल है। यदि तुम एक सच्चे ईसाई हो, तो तुम निश्चय ही इस बात पर विश्वास करोगे कि किसी भी देश या राष्ट्र का उत्थान या पतन परमेश्वर की योजना के अनुसार होता है।