परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है

सर्वशक्तिमान परमेश्‍वर कहते हैं:"परमेश्वर ने इस संसार की सृष्टि की, उसने इस मानवजाति को बनाया, और इसके अलावा वह प्राचीन यूनानी संस्कृति और मानव सभ्यता का वास्तुकार था। केवल परमेश्वर ही इस मानवजाति को सांत्वना देता है, और केवल परमेश्वर ही रात-दिन इस मानवजाति का ध्यान रखता है।
मानव का विकास और प्रगति परमेश्वर की सम्प्रभुता से अवियोज्य है और मानवजाति का इतिहास और भविष्य परमेश्वर की योजनाओं में जटिल है। यदि तुम एक सच्चे ईसाई हो, तो तुम निश्चय ही इस बात पर विश्वास करोगे कि किसी भी देश या राष्ट्र का उत्थान या पतन परमेश्वर की योजना के अनुसार होता है। केवल परमेश्वर ही किसी देश या राष्ट्र के भाग्य को जानता है और केवल परमेश्वर ही इस मानवजाति के जीवन के ढंग को नियंत्रित करता है। यदि मानवजाति अच्छा भाग्य पाना चाहती है, यदि कोई देश अच्छा भाग्य पाना चाहता है, तो मनुष्य को अवश्य परमेश्वर की आराधना में झुकना चाहिए, पश्चाताप करना चाहिए और परमेश्वर के सामने अपने पापों की स्वीकार करना चाहिए, अन्यथा मनुष्य का भाग्य और मंज़िल अपरिहार्य रूप से तबाह हो कर समाप्त हो जाएँगे। नूह की नाव के समय में पीछे पलट कर देखें: मानवजाति पूरी तरह से भ्रष्ट थी, परमेश्वर की आशीषों से भटक गई थी, परमेश्वर के द्वारा उनकी देखभाल नहीं की जा रही थी, और परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को खो चुकी थी। वे परमेश्वर की रोशनी के बिना अंधकार में रहते थे। इस प्रकार वे प्रकृति से व्यभिचारी बन गए थे, उन्होंने अपने आप को घृणित चरित्रहीनता के मध्य उन्मुक्त कर दिया था। इस प्रकार के लोग परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं को प्राप्त नहीं कर सकते थे; वे परमेश्वर के चेहरे की गवाही देने के अयोग्य थे, न ही वे परमेश्वर की आवाज़ को सुनने के योग्य थे, क्योंकि उन्होंने परमेश्वर को त्याग दिया था, उन सब चीजों को बेक़ार समझ कर छोड़ दिया था जो परमेश्वर ने उन्हें प्रदान की थीं, और परमेश्वर की शिक्षाओं को भूल गए थे। उनका मन परमेश्वर से बहुत दूर भटक गया था, और जैसा कि इससे हुआ, वे अत्यधिक मूर्खतापूर्ण स्तरों तक और मानवता से पथभ्रष्ट हो गए थे, और उत्तरोत्तर दुष्ट होते गए। इस प्रकार से वे मृत्यु के और भी निकट आ गए थे, और परमेश्वर के कोप और दण्ड के अधीन हो गए थे। केवल नूह ने परमेश्वर की आराधना की और बुराई को दूर रखा, और इसलिए वह परमेश्वर की आवाज़ को सुनने और परमेश्वर के निर्देशों को सुनने में सक्षम था। उसने परमेश्वर के वचन के अनुसार नाव बनायी, और सभी प्रकार के जीवित प्राणियों को उसमें एकत्रित किया। और इस तरह, जब एक बार सब कुछ तैयार हो गया, तो परमेश्वर ने संसार पर अपनी विनाशलीला शुरू कर दी। केवल नूह और उसके परिवार के सात लोग इस विनाशलीला में जीवित बचे, क्योंकि नूह ने यहोवा की आराधना की थी और बुराई को दूर रखा था।" "परमेश्वर सम्पूर्ण मानवजाति के भाग्य का नियन्ता है" से

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