सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं :"जब तुम रोते हुए इस संसार में आते हो, उस समय तुम अपना कार्य करना प्रारम्भ कर देते हो। तुम परमेश्वर की योजना और विधान में अपनी भूमिका को अपना लेते हो। तुम अपने जीवन की यात्रा प्रारम्भ कर देते हो। तुम्हारी कैसी भी पृष्ठभूमि हो और तुम्हारे सामने कैसी भी यात्रा हो, स्वर्ग में रखी हुई योजनाओं और प्रबंधों से कोई भी बचकर नहीं भाग सकता और कोई भी अपने भाग्य पर नियंत्रण नहीं कर सकता, क्योंकि जो सभी बातों पर शासन करता है वही केवल ऐसे कार्यों को करने के योग्य है। जब से मनुष्य अस्तित्व में आया, परमेश्वर अपने कार्य में लगा हुआ है, इस ब्रह्माण्ड का प्रबंधन करता और सभी बातों के परिवर्तन एवं संचालन में निर्देश देता है। सभी बातों की तरह, परमेश्वर से मनुष्य चुपचाप और अनजाने में मिठास, बारिश और ओस का पोषण प्राप्त करता है। सभी बातों के समान, मनुष्य अनजाने में परमेश्वर के हाथ की योजनाओं की अधीनता में रहता है। मनुष्य का हृदय और आत्मा परमेश्वर के हाथ में है और मनुष्य का सम्पूर्ण जीवन परमेश्वर की आंखों के सामने है। चाहे तुम इस बात पर विश्वास करो या न करो, सभी चीजों में, चाहे वे जीवित हों या मृत, बदलाव, परिवर्तन, नवीनीकरण और विलोपन परमेश्वर की इच्छा से होता है। इस प्रकार से परमेश्वर सभी बातों पर शासन करता है। "
"परमेश्वर मनुष्य के जीवन का स्रोत है" से
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